काठजामुन

नम्रता श्रीवास्तव परिहा के घर की ओर जाने वाले ‘उसके’ पाँव अपना कार्य सुचारू ढंग से कर रहे थे, किन्तु कान से लेकर मस्तिष्क तक…

मि. वॉलरस

मनीषा कुलश्रेष्ठ विंडचाइम हवा में डोला और मेरी नींद खुल गई। मैं एक उदास सपने के आग़ोश में वैसे ही सोया था, जैसे तूफ़ान भरी…