मेरे घर का पुराना स्विच

वसी ज़ैदी

1
क़बीले


लाहौर के जिस क़बीले से उसका ताल्लुक़ था वो अमृतसर के एक क़बीले का पुराना दोस्त था।
एक दफ़ा दोनों को किसी वजह से एक तीसरे क़बीले की दावत पर साथ जाना था।
लाहौरी को अपनी बाँसुरी और अमृतसरी को अपनी आवाज़ पर बेहद घमंड था।
जब भी लाहौरी बाँसुरी बजाता तो अमृतसरी कोई नग़मा गाने लगती।
प्यार परवान चढ़ा पर दोनों क़बीले इसे बर्दाश्त नहीं कर सके और जंग शुरू हो गयी।
लाहौरी ने बाँसुरी बजाना छोड़ दिया था और अमृतसर से अब कोई नग़मा नहीं सुनायी देता था।
दावत में जब दो क़बीले आमने सामने थे तो इसरार हुआ कि बाँसुरी बजायी जाए और नग़मा गाया जाए।
एक बार फिर इस दोस्ती की मिसाल को ज़िंदा किया जाए, पर बाँसुरी से मातम और नग़मे में नोहे के सिवा कुछ सुनायी न दे सका।

2

अब मेरे घर मेहमान नहीं आता

अब मेरे घर मेहमान नहीं आता । कौआ काँव-काँव करता था तो दादी हांडी चढ़ा देती थी, कोई मेहमान आने वाला है। सहन में पानी से छिड़काव, क्यारी को पुराने ज़र्द पत्तों से निजात। कच्चे कोठे की मुँडेर पर मिट्टी के उभरे हुए हिस्से पर अब कौआ नहीं आता, अब मुँडेर के उभार पर काँच के टुकड़े लगा दिए गए हैं। अब मेरे घर मेहमान नहीं आता।

3

मेरे घर का पुराना स्विच 

मेरे घर का पुराना स्विच ख़ुद बख़ुद कभी खुल जाता है तो कभी बंद हो जाता है, दादी कहती थीं कि उस पर जिन्नात का असर है, मैंने कभी किसी जिन्न को नहीं देखा पर सुना है कि दादी के पीहर एक बहुत ख़ूबसूरत लड़की रहती थी 

वो जब भी छत पर बाल सुखाने जाती तो जिन्न उसे देखकर फ़रेफ़ता होता और इज़हार-ए-इश्क़ करता, कहता कि तुझ से शादी करूँगा |

कोई उसकी बात का यक़ीन नहीं करता था, दादी बताती थीं कि एक दिन दोपहर को ख़ूब ढोल ताशों की आवाज़ आई और वो लड़की छत से ग़ायब हो गयी |

एक दिन दादी भी ऐसे ही ग़ायब हो गयीं बिना किसी ढोल ताशों की आवाज़ के, पर मेरे घर का पुराना स्विच अब भी ख़ुद कभी खुल जाता है, तो कभी बंद हो जाता है |

वसी, पेशे से सॉफ़्टवेयर इंजीनियर हैं और दास्ताँगोई करते हैं।

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